माँ और बहन ने चोदना सिखाया

प्रेषक : मोहित …

हैल्लो दोस्तों, आपने और मैंने कामुकता डॉट कॉम पर बहुत सी स्टोरी पढ़ी है, जो बहुत ही हसीन है मगर में आज आपको अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। अब में आपको सबसे पहले अपना परिचय दे दूँ। मेरा नाम मोहित है, मेरी माँ का नाम उर्वशी है और मेरी छोटी बहन का नाम प्रिया है। चलो अब में आपका ज्यादा टाईम ख़राब ना करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ। में मेरठ का रहने वाला हूँ, मेरा परिवार काफ़ी फ्रेंक है। मेरी माँ माँ कम और दोस्त ज्यादा है। ये बात सर्दियो की है जब में अपने कमरे में बैठकर टी.वी देख रहा था और माँ मैग्जीन पढ़ रही थी और पापा फेक्ट्री में थे और प्रिया अपनी पढ़ाई कर रही थी। तभी बेल बजी, तो माँ उठकर गयी, तो मैंने मैग्जीन उठा ली तो उसमें कुछ हॉट पिक्स भी थी। फिर जैसे ही मैंने कुछ पेज चेंज किए तो उसमें कंडोम का एड आ गया। अब में अपने लंड को खुजाने लगा था, जो कि अब गर्म हो गया था और अब उसे जीन्स में रखना मुश्किल हो गया था।

फिर मैंने अपनी जीन्स थोड़ी ढीली की तो तब मेरा लंड पूरा तनकर 8 इंच का हो गया था। फिर में अपना एक हाथ अ[नी जीन्स में डालकर मेरे लंड को मसलने लगा, ताकि मेरा लंड शांत हो जाए, लेकिन इतनी देर में माँ आ गयी और उन्होंने देख लिया, लेकिन उन्हें लगा कि मैंने उन्हें नहीं देखा है। फिर मुझमें जोश आ गया और मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा। माँ एकदम  आगे आ गयी तो मैंने अपना लंड एकदम से अंदर कर लिया। तो उन्होंने कहा कि क्या बात है? तो मैंने  कहा कि कुछ नहीं ये एड देखकर गर्म हो गया था। तो वो बोली कि कौन सा एड? और मेरे हाथ से किताब लेली और बोली कि तुझे पता है यह क्या है? तो मैंने कहा कि हाँ, लेकिन यूज़ करना नहीं आता।

फिर वो बोली कि चल बेडरूम में बताती हूँ, कैसे लगता है? अब मुझे तो मानो मजा आ गया था तो में जल्दी से कमरे में चला गया और वो भी कमरे में आ गयी। अब दरवाजा खुला था, शायद माँ प्रिया को बताकर आई थी। फिर माँ कमरे में आई और बोली कि चल जीन्स उतार, तो मैंने कहा कि आप उतारो क्योंकि वो भी गर्म थी और में भी गर्म था, तो उन्होंने मेरी जीन्स उतारी और मेरा अंडरवेयर भी उतार दिता। फिर मैंने कहा कि माँ आप भी उतारो, तो उन्होंने कहा कि चल तू ही उतार दे, तो पहले तो मैंने फिल्म स्टाइल में उनकी साड़ी खोली और फिर ब्लाउज और ब्रा भी उतार दी। अब मुझसे उनका पेटीकोट नहीं खुल रहा था इसीलिए मैंने उनके पेटीकोट के नाड़े को तोड़ दिया, तो वो एकदम से ज़मीन पर उतर गया, अब माँ बिल्कुल नंगी हो गयी थी। फिर मुझे लगा कि गेट पर कोई है तो मैंने देखा कि बाहर प्रिया खड़ी थी, लेकिन उसे महसूस नहीं हुआ। अब माँ मेरा लंड पकड़कर बैठ गयी थी और में बेड पर था और वो फर्श पर थी।

फिर उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया, उनके हाथ में कुछ था मगर जोश के कारण मैंने देखा नहीं था, अब वो मेरा लंड लॉलीपोप की तरह चूस रही थी। फिर माँ बोली कि मजा आ गया, तो मैंने कहा कि हाआआआआआआआ बहुत मजा आआआ रहा है। तो माँ बोली कि प्लीज जराआआआआ जल्दी करो, तो मैंने कहा कि अभी रुको अभी तो बहुत मजा बाकी है और बोला कि माँ एक बात मनोगी। तो उन्होंने कहा जब ये है तो और बता, तो मैंने कहा कि प्रिया बाहर खड़ी है उसे भी अंदर बुला लो, तो माँ हँसने लगी। अब माँ जानती थी कि प्रिया अंदर आ गयी है और बैठ गयी है और माँ बेटा का खेल देख रही थी।  अब उससे भी रहा नहीं जा रहा था तो वो अपनी चूत खुजा रही थी। फिर माँ बोली कि आजा प्रिया तू भी जॉइन कर। अब वो तो जैसे एकदम तैयार थी तो उसने झट से अपने कपड़े उतार दिए, अब वो भी बिल्कुल नंगी थी।

फिर माँ ने अपना हाथ खोला तो उसमें कंडोम था। फिर माँ ने कहा कि आज तुझे इसे लगाना बताउंगी, तो मैंने कहा कि ठीक है माँ और कंडोम खोला था कि इतने में डोर बेल बजी। तो माँ बोली कि तुम रूको, में देखती हूँ। तो मैंने कहा कि ठीक है, तो माँ ने गाउन पहना और गेट बंद करके चली गयी। अब में और प्रिया अकेले थे, तो में बोला कि प्रिया यहाँ बैठो। अब वो बहुत गर्म थी तो उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और बोली कि क्या में माँ का काम कर सकती हूँ? तो में बहुत खुश हो गया और अपना सिर हिलाने लगा। फिर हम दोनों 69 की पोजिशन में हो गये, तो वो मेरा लंड चूसने लगी और में उसकी चूत को चाटने लगा। फिर उसने कहा कि आज सब कुछ है मुझसे संतुष्ट कर दो, तो में बोला कि ठीक है। फिर हम दोनों ठीक हुए, अब माँ सबकुछ देख रही थी, अब में भी यही चाहता था तो मैंने कहा कि इसे सेक्स कहते है और इतना कहकर मैंने अपने होंठो को उसके होंठ पर रख दिया और उसे किस करने लगा। तो वो भी मेरे होंठो को चूसने लगी, तो कभी वो मेरे ऊपर के होंठ को चूसती तो कभी मेरे दोनों होंठो को एक साथ चूस रही थी।

अब मेरा एक हाथ उसके बूब्स पर और दूसरा हाथ उसकी चूत पर था। अब वो काफ़ी गर्म हो गयी थी, अब  उसकी चूत में से पानी निकल रहा था। तो मैंने बिल्कुल भी देर नहीं की और अपनी जेब में से कंडोम निकाला और अपने लंड पर चढ़ाया। (क्योंकि में जानता हूँ कि इसमें कभी रिस्क नहीं लेनी चाहिए) तो वो बोली कि ये क्या है? और इसे तुम अपने लंड पर क्यो चढ़ा रहे हो? तो  मैंने कहा कि ये सुरक्षा के लिए है और में ये कहते ही उसके ऊपर चढ़ गया और उसे वापस से किस करने लगा। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया और उसे अपनी चूत पर मसलने को बोला। तो उसने अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर मसलने लगी। अब में धीरे-धीरे अपना दबाव बढ़ाने लगा था, अब इसमें जल्दबाजी करने से बात बिगड़ भी सकती है।

फिर मैंने मौका देखकर एक हल्का सा धक्का लगाया तो वो चिल्ला उठी आआआआअ भैयाआआआआअ बहुत दर्द हो रहाआआआआअ है, प्लीज इसे बाहर निकाल दो। अब उसकी चूत की सील टूटने की वजह से खून बहने लगा था और वो दर्द से कराह रही थी। फिर मैंने उसे किस करना शुरू किया, तो  इससे उसे थोड़ी राहत मिली। फिर में थोड़ी देर तक बिल्कुल भी नहीं हिला और फिर बाद में मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाई, तो वो सिसकियाँ लेने लगी। अब वो भी नीचे से धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाने लगी थी कि इतने में माँ आ गयी और उन्होंने प्रिया को शांत किया और उसकी चूत को मसलने लगी और माँ ने फिर से अपना गाउन उतार दिया। अब मेरा लंड सिर्फ़ 2 इंच ही अंदर था, लेकिन उसकी चूत अभी भी मेरा पूरा लंड लेने के लिए तैयार नहीं थी।

फिर माँ बोली कि आराम-आराम से करो तो फिर भी मैंने थोड़ी और कोशिश की। अब वो खुद ही मेरी गांड में अपना हाथ लगाकर उसे अपनी और खींचने लगी थी, तो धीरे-धीरे मेरा पूरा लंड उसकी चूत में  समा गया। अब माँ उसके बूब्स दबा रही थी और में माँ की चूत को चाट रहा था, तो कभी में उसे अपने ऊपर चढ़ाता, तो कभी वो मेरे नीचे हो जाती। अब में उसके बूब्स और उसकी गांड को बारी-बारी से दबा रहा था, अब वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी और उसे बहुत मज़ा आ रहा था। अब चुदवाने के बाद वो मेरे ऊपर पूरी नंगी पड़ी हुई थी और बोल रही थी कि मुझे उंगली से इतना मज़ा कभी नहीं आया जितना आज आया है, भैया प्लीज आप रोज़ मेरे साथ ऐसा करना ना,  मुझे आपका लंड बहुत अच्छा लगता है और ऐसा बोलकर वो मेरे लंड के साथ खेलने लगी, तो कभी उसे ऊपर उठाती, तो कभी अपने दोनों हाथों से हिलाती। अब उसके छोटे-छोटे हाथों में मेरा टाईट लंड बहुत बड़ा लग रहा था।

फिर मैंने भी उसकी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी, तो वो बोली कि मोहित भैया आप जानते है कि उनकी गुड़िया को कैसे खुश रखा जाए? अब में उसके बूब्स दबाने लगा था और उसके होंठो पर किस करने लगा था। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने फिर से उसकी चूत में अपना लंड डाला और उसे स्वर्ग का सुख दिया, जो उसे बहुत सालों के बाद मिलने वाला था, लेकिन हाँ कभी भी अपनी बहन को चोदो तो प्लीज कंडोम जरूर पहनना, वरना तुम जानते हो की क्या हो सकता है? अब 18 साल की उम्र में ही मुझे एक बहुत ही सेक्सी और वर्जिन गर्ल को चोदने का मौका मिला था। अब माँ मेरा इंतजार कर रही थी, अब में काफ़ी थक चुका था में आज लगातार दो औरतों के साथ चुदाई कर रहा था। फिर मैंने अपना मुँह घुमाकर देखा, तो माँ प्रिया की चूची उसके कपड़ो के ऊपर से ही दबा रही थी। अब प्रिया के कपड़े आधे खुले हुए थे, प्रिया ने जींस और टी-शर्ट उतार रखी थी और अब माँ भी नंगी थी। प्रिया की चूची बहुत ही सेक्सी थी, उसकी चूची बहुत बड़ी-बड़ी थी, अब उसके निपल इस समय बिल्कुल फूलकर खड़े और कड़क हो गये थे। फिर प्रिया माँ की एक निपल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और अपने एक हाथ को माँ की जांघों के बीच में घुमाने लगी थी।

फिर प्रिया ने अपना मुँह माँ की चूत पर रख दिया और थोड़ी देर के बाद प्रिया ने अपनी जीभ निकालकर माँ की चूत के अंदर कर दी। अब में यह सब देख रहा था, अब माँ इतनी गर्म हो गयी थी कि वो खुद ही अपने हाथों से अपने निपल मसल रही थी। अब यह सब देखकर मेरा वासना का ज्वार फिर से आने लगा था और मेरा लंड चुदाई के लिए फिर से गर्म होने लगा था। फिर में उठकर प्रिया और माँ के पास पहुँच गया और उन दोनों की कामलीला को ध्यान से देखने लगा और उन दोनों को देखते-देखते मैंने अपना एक हाथ माँ की चूची पर रख दिया और उनकी निपल को अपने हाथों में लेकर अपनी उंगलियों के बीच में रखकर मसलने लगा। तो माँ मेरी तरफ मुड़ी तो माँ ने देखा कि में उनके बगल ने नंगे खड़ा हूँ और अब मेरा लंड गर्म होकर खड़ा होने लगा था। फिर माँ ने मेरा लंड अपने हाथों में लेकर मुझसे पूछा कि क्या मोहित अब तुम मुझको भी चोदोगे?  हाँ में भी अपनी बेटी की तरह अपनी चूत तुमसे चुदवाना चाहती हूँ, प्लीज़ मुझे भी अपने लंड से चोदो, लेकिन तुम्हारे लंड को क्या हो गया है? क्या अब यह मेरी चूत में घुसने के काबिल है?

में लड़कियों की चुदाई का पुराना खिलाड़ी था तो मैंने अपने लंड को हिलाते हुए कहा कि घबराओ मत अभी तुम्हें अपना लंड का कमाल दिखाता हूँ और यह कहकर मैंने अपना लंड माँ के मुँह में दे दिया और बोला कि लो मेरी जान, मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसो। तो अब माँ भी मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर उस पर अपनी जीभ चलाने लगी थी, तो कभी उस पर अपने दाँत चुभाने लगी थी। अब माँ की लंड चुसाई से मुझको बहुत मज़ा आया और अब मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा था और उधर प्रिया अपने एक हाथ से माँ की चूत को सहला रही थी और दूसरे हाथ से मेरी गांड में अपनी एक उंगली पेल रही थी। अब थोड़ी देर तक लंड चुसाई और मेरी गांड में प्रिया की उंगली होने से मेरा लंड पूरे जोश के साथ खड़ा हो गया था और फिर से चुदाई शुरू करने के लिए तैयार था।

फिर मैंने अपना लंड माँ के मुँह से बाहर निकाला और माँ के दोनों पैरो के बीच में आकर बैठ गया।  फिर मैंने अपने दोनों हाथों से माँ की चूत को फैलाया और उसके अंदर अपनी जीभ डाल दी। अब में अपनी जीभ को माँ की चूत में अंदर-बाहर करने लगा था और उनकी चूत की अंदर की दीवारों के साथ अपनी जीभ से खेलने लगा था, तो कभी अपनी जीभ से माँ की गांड भी चाट रहा था, तो कभी उसको अपने दातों के बीच में पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से चूस रहा था। अब माँ काफ़ी बैचेन थी और अपनी कमर हिला-हिलाकर अपनी चूत को मेरे मुँह पर आगे पीछे कर रही थी। अब में समझ गया था कि माँ की चूत लंड खाने की लिए तैयार है। अब मेरा लंड भी पहले जैसा तगड़ा हो गया था और माँ की चूत में घुसने के लिए उतावला था। फिर मैंने अपनी जीभ माँ की चूत से बाहर निकाल ली और अपना सुपाड़ा माँ की चूत पर रखकर एक हल्का सा धक्का दिया तो मेरा आधा लंड माँ की चूत में चला गया। अब प्रिया माँ की चूची और चूत से खेलने लगी थी।

फिर मैंने माँ के दोनों पैरो को फैलाकर एक और धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड माँ की चूत के अंदर चला गया। अब उधर प्रिया माँ की एक-एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूस रही थी। फिर मैंने माँ के दोनों पैर हवा में उठा दिए और उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया, ताकि माँ छूट ना जाए। फिर मैंने माँ की चूत पर अपना लंड रखा और माँ के कुछ समझने के पहले ही एक ज़ोरदार झटका दिया तो मेरा पूरा लंड एक ही झटके से पूरा का पूरा अंदर चला गया। अब माँ इस अचानक हुए हमले से पहले तो चीखी और मुझको अपने ऊपर से हटाने के लिए धक्का मारा, लेकिन इस बार मेरी पकड़ बहुत ही मजबूत थी। फिर में अपनी कमर आगे पीछे करके अपना लंड माँ की चूत में धीरे-धीरे पेलने लगा। तो थोड़ी देर के बाद माँ को भी मज़ा आने लगा और वो भी अपनी कमर उठा-उठाकर मेरा चुदाई में सहयोग करने लगी। अब में और माँ दोनों एक दूसरे को ऊपर और नीचे से धक्के मार रहे थे और अब माँ की चूत में मेरा लंड तेज़ी से आ-जा रहा था।

अब प्रिया चुदाई के जोश से हटकर हम दोनों की चुदाई देख रही थी और एक दूसरे की चूत में उंगली कर रही थी। अब में और माँ दोनों एक दूसरे से चूत और लंड के साथ जुड़े हुए थे। फिर थोड़ी देर के बाद माँ की चूत में से पानी निकलने लगा तो मैंने अपनी चुदाई की स्पीड और तेज़ कर दी, क्योंकि अब में भी झड़ने वाला था। फिर मैंने अपने आख़री के 4-5 धक्के ज़ोर से माँ की चूत पर अपने लंड से मारे और फिर माँ की चूत के अंदर अपना पूरा का पूरा लंड डालकर झड़ गया। अब माँ भी थककर झड़ चुकी थी और मेरा सारा पानी माँ की चूत में समा गया था। अब हम दोनों हाँफ रहे थे और एक दूसरे से चिपके हुए पड़े थे। फिर मैंने अपने लंड को माँ की चूत से बाहर निकाला तो उससे ढेर सारा पानी निकलने लगा।प्रिया ने जल्दी से अपना मुँह माँ की चूत पर लगा दिया और उससे निकल रहा मेरा और माँ की चूत के पानी का मिश्रण अपनी जीभ से चाट-चाटकर पी गयी। फिर माँ ने कहा कि आज तुमने हम दोनों को बहुत मज़ा दिया है और फिर हम दोनों ऐसे ही नंगे ही सो गये और फिर में पूरा हफ़्ता उनको चोदता रहा ।।

धन्यवाद …


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